उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 सरल भाषा में: ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म को क्या करना होता है

अपडेट 2026-10 · सामान्य जानकारी, कानूनी सलाह नहीं।

उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 ऑनलाइन मार्केटप्लेस और विक्रेताओं पर ज़िम्मेदारियाँ तय करते हैं। शिकायत में इनका हवाला देने से कंपनी को पता चलता है कि आप उसकी ज़िम्मेदारियाँ जानते हैं।

यह कब काम आता है

  • ऑनलाइन ऑर्डर, रिफ़ंड या कैंसलेशन में गड़बड़ी हुई
  • शिकायत अधिकारी नहीं मिल रहा या जवाब नहीं आ रहा
  • लिस्टिंग में विक्रेता, क़ीमत या रिटर्न की शर्तें छिपाई गईं

कदम-दर-कदम

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    शिकायत अधिकारी खोजें

    प्लेटफ़ॉर्म को शिकायत अधिकारी का नाम और संपर्क दिखाना ज़रूरी है। उसे अपने ऑर्डर की जानकारी के साथ लिखें।

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    समय-सीमाओं का इस्तेमाल करें

    प्लेटफ़ॉर्म को शिकायत की पावती 48 घंटे में और समाधान एक महीने में देना चाहिए।

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    लिस्टिंग की जानकारी जाँचें

    विक्रेताओं और प्लेटफ़ॉर्म को साफ़ जानकारी दिखानी होती है, जैसे विक्रेता का नाम और पता, कुल क़ीमत और रिटर्न व रिफ़ंड की शर्तें।

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    आगे बढ़ें

    हल न निकले तो राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) और फिर e-Jagriti पर उपभोक्ता आयोग जाएँ।

ज़रूरी बातें

  • 48 घंटे में पावती, एक महीने में समाधान
  • प्लेटफ़ॉर्म को शिकायत अधिकारी की जानकारी दिखानी होती है
  • लिस्टिंग और ऑर्डर के स्क्रीनशॉट रखें

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आम सवाल

क्या ये नियम हर ऑनलाइन विक्रेता पर लागू हैं?

ये भारतीय उपभोक्ताओं को बेचने वाले ऑनलाइन मार्केटप्लेस और विक्रेताओं पर लागू हैं; अपवादों के लिए नियम देखें।

आगे कहाँ जाएँ?

राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन, फिर उपभोक्ता आयोग।

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