मोबाइल या ब्रॉडबैंड की शिकायत: भारत में आगे कैसे बढ़ें

अपडेट 2026-10 · सामान्य जानकारी, कानूनी सलाह नहीं।

टेलीकॉम कंपनियों के पास शिकायत केंद्र और अपील का रास्ता होना ज़रूरी है। वे समस्या न सुलझाएँ तो आप आगे बढ़ सकते हैं और आख़िर में उपभोक्ता आयोग जा सकते हैं।

यह कब काम आता है

  • बिल में ऐसे चार्ज हैं जिनसे आप सहमत नहीं
  • कनेक्शन या ब्रॉडबैंड बंद है और ठीक नहीं हुआ
  • पोर्ट-आउट, रिफ़ंड या नया कनेक्शन अटका है

कदम-दर-कदम

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    कंपनी में शिकायत करें और डॉकेट नंबर लें

    कस्टमर केयर नंबर, ऐप या ईमेल से शिकायत करें। शिकायत (डॉकेट) नंबर माँगें और तारीख़ नोट करें।

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    अपीलीय प्राधिकारी के पास अपील करें

    शिकायत हल न हो या जवाब से संतुष्टि न हो तो कंपनी के अपीलीय प्राधिकारी के पास अपील करें। जवाब में दी गई समय-सीमा देखें।

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    सरकारी पोर्टल इस्तेमाल करें

    आप CPGRAMS पोर्टल पर भी शिकायत कर सकते हैं या राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 पर कॉल कर सकते हैं।

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    नोटिस भेजें और उपभोक्ता आयोग में केस करें

    रिफ़ंड या मुआवज़े के लिए कानूनी नोटिस भेजें, फिर e-Jagriti पर ऑनलाइन केस दर्ज करें।

ज़रूरी बातें

  • डॉकेट नंबर हमेशा लें और रखें
  • उपभोक्ता आयोग में समय-सीमा 2 साल है
  • बिल, स्क्रीनशॉट और कॉल की तारीख़ें रखें

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आम सवाल

कंपनी अनसुना करे तो किसके पास जाएँ?

उसके अपीलीय प्राधिकारी के पास, फिर CPGRAMS या 1915, और आख़िर में उपभोक्ता आयोग।

क्या लंबे समय बंद रहने पर मुआवज़ा मिल सकता है?

आप कंपनी से माँग सकते हैं और मना करे तो बंदी के सबूत के साथ उपभोक्ता आयोग में।

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