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चेक बाउंस: धारा 138 नोटिस और समय-सीमाएँ

अपडेट 2026-10 · सामान्य जानकारी, कानूनी सलाह नहीं।

क़र्ज़ चुकाने के लिए दिया गया चेक बाउंस होना परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत आपराधिक अपराध है। क़ानून सख़्त समय-सीमाएँ तय करता है, और एक भी चूकने से केस ख़त्म हो सकता है।

यह कब काम आता है

  • आपको दिया गया चेक बिना भुगतान के लौट आया
  • बैंक ने रिटर्न मेमो दिया, जैसे "अपर्याप्त राशि"
  • चेक किसी क़र्ज़ या आपको देय रकम के लिए था

कदम-दर-कदम

  1. 1

    रिटर्न मेमो सँभालकर रखें

    बैंक मेमो मिलने से 30 दिन की गिनती शुरू होती है।

  2. 2

    30 दिनों में नोटिस भेजें

    नोटिस मिलने के 15 दिनों के अंदर चेक की रकम चुकाने की माँग करें।

  3. 3

    15 दिन इंतज़ार करें

    कई लोग आपराधिक केस से बचने के लिए इसी समय में भुगतान कर देते हैं।

  4. 4

    एक महीने में शिकायत दायर करें

    भुगतान न हो तो 15 दिन पूरे होने के बाद एक महीने के अंदर मजिस्ट्रेट के सामने शिकायत करें।

ज़रूरी बातें

  • रिटर्न मेमो के 30 दिनों के अंदर नोटिस
  • भुगतान के लिए दूसरे पक्ष को 15 दिन
  • सज़ा 2 साल तक की जेल या चेक की रकम के दोगुने तक जुर्माना हो सकती है

अपनी मुफ़्त योजना पाइए

बताइए क्या हुआ। हम आपके विकल्प बताते हैं, पत्र तैयार करते हैं और हर समय-सीमा पर नज़र रखते हैं।

आम सवाल

अगर 30 दिन की समय-सीमा निकल गई तो?

धारा 138 का केस शायद न हो सके, पर आप दीवानी केस से पैसा वसूल कर सकते हैं। वकील से बात करें।

क्या नोटिस वकील से ही भेजना ज़रूरी है?

क़ानूनन नहीं, पर सख़्त समय-सीमाओं की वजह से ज़्यादातर लोग वकील की मदद लेते हैं।