भारत में उपभोक्ता शिकायत कैसे दर्ज करें
अपडेट 2026-10 · सामान्य जानकारी, कानूनी सलाह नहीं।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत आप किसी भी विक्रेता या सेवा देने वाले से रिफ़ंड, बदली या मुआवज़ा माँग सकते हैं। अगर आप कदम-दर-कदम चलें तो ज़्यादातर मामले आयोग तक पहुँचने से पहले सुलझ जाते हैं।
यह कब काम आता है
- रिफ़ंड या बदली नहीं मिली
- सामान ख़राब है या बताए अनुसार नहीं है
- सेवा ख़राब, देर से या बिल्कुल नहीं मिली
कदम-दर-कदम
- 1
कंपनी को लिखें
ऑर्डर नंबर, तारीख़ें और आपकी माँग के साथ शिकायत अधिकारी को ईमेल करें। ऑनलाइन विक्रेता को 48 घंटे में पावती देनी होती है और एक महीने में समाधान करना होता है।
- 2
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर कॉल करें
1915 पर कॉल करें या consumerhelpline.gov.in पर शिकायत करें। हेल्पलाइन आपकी शिकायत सीधे कंपनी तक पहुँचाती है।
- 3
कानूनी नोटिस भेजें
वकील का नोटिस कंपनी को आयोग जाने से पहले आख़िरी समय-सीमा देता है, आमतौर पर 15 दिन।
- 4
उपभोक्ता आयोग में शिकायत करें
अपने ही ज़िले में e-Jagriti पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत करें। ₹50 लाख तक के दावे ज़िला आयोग में जाते हैं।
ज़रूरी बातें
- समय-सीमा: समस्या होने से 2 साल के अंदर
- ₹5 लाख तक के दावों पर कोई फ़ीस नहीं
- आप बिना वकील के शिकायत कर सकते हैं
ज़िला उपभोक्ता आयोगों में दायर सभी मामलों में से 91% का फ़ैसला हो चुका है।
स्रोत: NCDRC (opens in a new tab)अपनी मुफ़्त योजना पाइए
बताइए क्या हुआ। हम आपके विकल्प बताते हैं, पत्र तैयार करते हैं और हर समय-सीमा पर नज़र रखते हैं।
आम सवाल
क्या उपभोक्ता शिकायत के लिए वकील ज़रूरी है?
नहीं। आप ख़ुद शिकायत कर सकते हैं। कई लोग कानूनी नोटिस और जटिल मामलों के लिए वकील की मदद लेते हैं।
क्या ऑनलाइन ख़रीदारी की शिकायत कर सकते हैं?
हाँ। ई-कॉमर्स विक्रेता और प्लेटफ़ॉर्म भी इसके दायरे में हैं, और आप अपने ज़िले में शिकायत कर सकते हैं।